कठिन समय देर तक नहीं चलता ..! - किताब सारांश, भाग-2

Tough times never last. But tough people do

रचनात्मक रूप से समस्या का प्रबंधन करने के तरीके:           

रॉबर्ट एच शुलर (Robert H. Schuller) की बेस्ट सेलर किताब “Tough Times Never Last, But Tough People Do!” के सारांश का दूसरा भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ | किताब में शुलर का प्रेरणादायाक सन्देश है कि मज़बूत इरादों और सकारात्मक सोच में समस्याओं पर जीत हासिल करने की शक्ति है |

पिछले ब्लॉग में समस्याओं के विषय में क्या 6 बातें हमें जननी चहिये पर चर्चा की थी | इस भाग में शुलर द्वारा समस्याओं का रचनात्मक एवं सकारात्मक रूप से प्रबंधन करने के लिए क्या कहा गया है को प्रस्तुत कर रहा हूँ | 

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समस्या का सही आकलन करें:

समस्याओं का समाधान या सही प्रबंधन तब तक नहीं हो सकता जब तक आप उन्हें गंभीरता से नहीं लेते | किसी भी समस्या का समाधान समस्या से एक स्तर ऊपर उठकर ही निकाला जा सकता है | अतः समस्या का समाधान करने के लिए उसे भली प्रकार समझना  आवश्यक है | समस्या का सही आकलन ही आपको सही विकल्प तक ले जा सकता है |

अकसर लोग समस्या को बड़ा या छोटा समझाने की भूल कर देते हैं | दोनों ही स्थिति आपके प्रयासों को कमज़ोर करती हैं | समस्या का कम आकलन करने पर आपके द्वारा समाधान के प्रयास भी कम होते हैं और आपकी तैयारी पूर्ण नहीं रहती | नतीजा समस्या का कुप्रबंधन होता है | थोड़ा करने से चलेगा यह सोच गलत है | अपूर्ण प्रयास अपूर्ण सफलता ही दे सकते हैं |

वहीँ समस्या को बड़ा समझने पर आप समस्या से अभिभूत हो जाते हैं और संदेह व असफलता के डर के कारण सभी संभव प्रयास नहीं करते | समस्या का भय स्वयं समस्या से बड़ा हो जाता है | इस भय से आप समस्या से निपटने के प्रयासों को ही छोड़ देते हैं | आप डरकर निष्क्रीय हो जाते हैं और समझौते को ही समाधान समझने लगते हैं |

समस्या को अधिक समझकर आप उसका आकार बढ़ा देते हैं जो आपको डराता है | डरा हुआ व्यक्ति क्रोध का सहारा लेता है जिससे समस्याएं और बढ़ती हैं |


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समस्या से निपटने के लिए अपनी क्षमताओं का आंकलन करें:

समस्या के आकलन के साथ साथ आप स्वयं की क्षमताओं का भी आकलन करें | समस्या से निपटने के लिए आप कितना तैयार हैं यह जानना अत्यंत आवश्यक है |

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समस्या का समाधान स्वयं हो जाएगा यह इंतज़ार न करें:

समस्या स्वयं समाप्त हो जायेगी या उसका समाधान खुद ही आपके पास पहुँच जाएगा यह सोच न रखें | समस्या को बढ़ने न दें | समाधान के प्रयासों में की गयी देर समस्या को और गंभीर बना सकती है | समस्या से निपटने की कार्यवाही तुरंत करें | अभी कुछ करूँ या न करूँ की दुविधा न पालें | क्यों कि दुविधा में पड़ा इंसान आलस्य का शिकार होता है |

यदि आप समझते हैं कि आपकी समस्या स्वयं समाप्त हो जायेगी या उसका निराकरण कोई और करेगा तो आप अपने जीवन का नेतृत्व किसी अन्य परिस्थिति / व्यक्ति के हाथ में दे रहे हैं जिसका होना निश्चित नहीं है |

प्रत्येक स्थिति में अपने जीवन का नेतृत्व सदैव अपने हाथ में रखें | अपने जीवन का नेतृत्व कभी भी किसी अन्य के हाथ में नहीं जाने दें, चाहे वह किसी व्यक्ति के कारण हो, चाहे वह आपका डर, आपकी निराशा या जीवन के कटु अनुभवों के कारण हो | चाहे वह आपके शत्रु हों या मित्र हों |

हाँ, आप अपने जीवन का नेतृत्व आस्था और विश्वास के हांथों में अवश्य दे सकते हैं | आस्था को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं और आस्था को अपने प्रत्येक कार्य व निर्णयों का आधार बनाएं |  

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समस्या का समाधान ढूंढने के लिए कटिबद्ध हों:

समस्या का समाधान तो हो सकता था, आप समस्या को सुलझा सकते थे, किन्तु आपने पूरी लगन से प्रयास नहीं किये तो बात नहीं बनेगी | समस्या का समाधान करने के लिए आपका निश्चय, आपकी लगन और आपकी कटिबद्धता आवश्यक है |

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IPDE तरीके का प्रयोग करें:

Identify           -     समस्या को समझें

Predict            -    अनुमान लगायें कि यह समस्या आपको किस

   प्रकार से और कितना प्रभावित कर सकती है

Decide            -    अपने विकल्पों को समझते हुए अपनी रणनीति

   निश्चित करें

Execute           -    अपनी रणनीति को क्रियान्वित करें


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समाधान को पाना / खोजना पड़ता है:

समाधान आपके पास नहीं आता है | जहाँ समस्या को सुलझाने का तरीका मिले वहां आपको जाना होता है | यह जाने कि समस्या का समाधान कहाँ से या कहाँ पे मिल सकता है और उस तक कैसे पहुंचा जा सकता है |

समाधान को उसी तरह खोजें जैसे आप अपने लिए जीवन साथी को खोजते हैं |

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सहायता लें / मांगे:

यह संभव नहीं कि सभी परिस्थितियों का आप अकेले सामना कर सकें | ऐसी परिस्थिति में जिस व्यक्ति की सहायता से समस्या सुलझ सके उसकी मदद अवश्य मांगे | मिलकर विपत्ति का सामना करना अकेले जूझने से बेहतर है |

ध्यान रहे कि सफलता और अभिमान के बीच का चुनाव आपको करना है |


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परिस्थितियों को बेहतर बनाएं:

सदैव परिस्थितियों को बेहतर बनाने का प्रयास करें | परिस्थितियों को यदि बदल नहीं पा रहे हैं तो भी उनमे सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास कभी न छोड़ें | आप समस्या समाप्त भले ही न कर पायें पर उसका प्रबंधन अवश्य कर लेंगे |

प्रतिक्रिया से सकारात्मक प्रबंप्रबंधन बेहतर है |

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नकारात्मक विचारों से बचें:

अपने आपको नकारात्मक विचारों, नकारात्मक व्यक्तियों और नकारात्मक शक्तियों से बचाएं | नकारात्मकता और अपने बीच एक दीवार बना कर रखें |  


*

निष्कर्ष:

  1. समस्या का सही आकलन ही आपको सही विकल्प तक ले जाता है |
  2. समस्या का आगे बढ़कर सक्रिय रूप से प्रबंधन करें, दूसरों के समाधान खोजने की प्रतीक्षा न करें |
  3. सकारात्मक विचार आपको सही विकल्प पाने में सहायता करते हैं वहीं  नकारात्मकता आपको समाधान से दूर ले जाती है |
  4. समाधान को खोजने के हर संभव प्रयास करें | लोगों से बात करें | उनसे सहायता मांगे | एक से दो भले | चर्चा से समाधान निकलते हैं |
  5. केवल समाधान जानना ही पर्याप्त नहीं | समाधान की रणनीति पर कार्य करने से ही सफलता मिलती है |


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