हम अक्सर इसी उधेड़बुन में रहते हैं कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं, लोग क्या कहेंगे और समाज हमें किस नज़र से देखेगा। दूसरों की अपेक्षाओं और सलाह के बीच हम यह भूल जाते हैं कि हमारे भीतर भी एक आवाज़ है—जो हमें हमारी राह दिखा सकती है। जीवन में दूसरों की सुनना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है अपने मन की आवाज़ सुनना, अपनी पहचान को समझना और अपने विवेक से अपनी राह चुनना। किन्तु कभी कभी दूसरों की आवाज़ें इतनी हावी हो जाती हैं कि हमारे भीतर की आवाज़ ही दबकर रह जाती है।
डॉ. कुंवर बेचैन की यह कविता हमें इसी भूल से बाहर निकलने का संदेश देती है। कविता का सबसे महत्वपूर्ण स्वर है—दूसरों की सुनो, लेकिन अपने विवेक को मत खोओ; दुनिया को समझो, लेकिन खुद को भी पहचानो।
सबकी बात न माना कर,
खुद को भी पहचाना कर।
दुनिया में जीना है तो,
कुछ अमृत पीना है तो
अपनी ओर निशाना कर।
सबकी बात न माना कर…
तूने फूल भी, कांटे भी,
कुछ पाये, कुछ बाँटे भी।
तेरे साथ रहे हर दम
मेले भी, सन्नाटे भी।
धूप अगर बरसात भी हैं,
दिन है तो फिर रात भी है।
गर्मी-सर्दी सहते दिन,
नहीं एक से रहते दिन।
सुख-दुःख दोनों के घर में
अपना आना-जाना कर।
सबकी बात न माना कर,
खुद को भी पहचाना कर।
जीवन में दूसरों की सलाह और विचारों का अपना महत्व है, लेकिन अपने निर्णय के लिए अपने विवेक और अपनी पहचान पर भरोसा करना भी उतना ही आवश्यक है।
कितने सकारात्मक विचार है!
दुनिया में कमियाँ हैं, परेशानियाँ हैं, दुःख हैं, अन्याय हैं—लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम भी निराशा का हिस्सा बन जाएँ। हम जहाँ हैं, वहाँ थोड़ा प्रेम बढ़ा सकते हैं। किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं। किसी दुखी व्यक्ति की बात सुन सकते हैं। किसी निराश व्यक्ति को उम्मीद दे सकते हैं। अपनी सुख दुख में सम भाव की शक्ति को पहचान सकते हैं ।
शायद इस कविता का सबसे बड़ा संदेश है—
दुनिया को बदलने से पहले खुद को पहचानो, खुद को थोड़ा बदलो और फिर जहाँ हो, वहाँ दुनिया को थोड़ा और सुंदर बनाओ।
यह जो यार मोहब्बत है,
.....................
अंत में डॉ. कुंवर बेचैन लिखते हैं
खुश होना, सब से मिलकर,
रहना फूलों सा खिलकर।
सच की राहों पर चलकर,
राहों को भी मंज़िल कर।
प्रिय में अपनी प्यास जगा,
मधुर मिलन की आस जगा।
सबको ही मनमीत बना,
दर्द मिलें तो गीत बना।
दुनिया बहुत सुहानी है,
इसको और सुहाना कर।
सबकी बात न माना कर,
खुद को भी पहचाना कर…
— डॉ. कुंवर बेचैन

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